JPNIC के 864 करोड़ रुपये पर अखिलेश यादव से OP राजभर ने मांगा हिसाब, PDA और अयोध्या की चुनौती पर भी घेरा।
लखनऊ, 11 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के मौके पर जेपीएनआईसी (जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर) को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए परियोजना पर खर्च हुई कथित 864 करोड़ रुपये की राशि का हिसाब मांगा है। राजभर ने जेपीएनआईसी के निर्माण, संचालन समिति की भूमिका और प्रस्तावित व्यावसायिक सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती और समाजवादी पार्टी की पीडीए राजनीति पर भी घेरा।
JPNIC पर खर्च हुए 864 करोड़ रुपये का हिसाब मांगकर उठाए सवाल।
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा, “अखिलेश जी, ड्रामा नहीं, हिसाब दीजिए।” उन्होंने सवाल किया कि जेपीएनआईसी परियोजना पर 864 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद इसके अधूरे रहने की वजह क्या थी और इतनी बड़ी राशि कहां खर्च हुई।
राजभर ने जेपीएनआईसी की संचालन समिति में अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और वसीम हसन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि समिति को कौन-कौन से अधिकार दिए जाने थे और परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी किसके पास होनी थी।
मंत्री ने केंद्र में प्रस्तावित होटल, क्लब, जिम और अन्य व्यावसायिक सुविधाओं का जिक्र करते हुए इनके संचालन तथा संभावित कमाई के इस्तेमाल पर भी सवाल किए। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से बनी संपत्ति से होने वाली आय की व्यवस्था किसके हित में की जा रही थी, यह स्पष्ट होना चाहिए। हालांकि, ये सवाल और आरोप राजभर की ओर से लगाए गए हैं। इनसे संबंधित वित्तीय अनियमितता अपने आप प्रमाणित नहीं होती।
अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती का किया जिक्र।
राजभर ने अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती भी याद दिलाई। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव ने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। राजभर के मुताबिक, मुख्यमंत्री की ओर से भी अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की बात कही गई थी।
इस मुद्दे पर अखिलेश यादव को घेरते हुए राजभर ने कहा, “अयोध्या आइए, पर्चा भरिए, चुनाव लड़िए।” उन्होंने सपा प्रमुख से अपनी कथित चुनौती पर आगे बढ़ने की बात कही और उनके चुनावी रुख पर सवाल उठाए।
PDA की राजनीति और राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन पर निशाना।
ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी की पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीति को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने सामाजिक प्रतिनिधित्व की अपनी नीति के बजाय परिवार और प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी।
राजभर ने रामगोपाल यादव और धनराज नाथवाणी के चयन का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या सपा को दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों से उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिले। उन्होंने सवाल किया कि पीडीए का मुद्दा केवल भाषणों और पोस्टरों तक सीमित है या पार्टी के फैसलों में भी इसका प्रतिनिधित्व दिखाई देता है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच JPNIC फिर चर्चा में।
जेपीएनआईसी के खर्च, संचालन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े इन सवालों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बहस को तेज कर दिया है। अब इस मामले में परियोजना के वास्तविक खर्च, निर्माण की स्थिति और संचालन व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों तथा संबंधित पक्षों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे। वहीं, पीडीए और अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती को लेकर राजभर के बयान से भाजपा-सुभासपा गठबंधन और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी चर्चा में हैं।



