उत्तर प्रदेश

‘अखिलेश खुद वोट चोरी कराकर BJP को जिता रहे थे?’ दयाशंकर सिंह का सवाल।

2027 चुनाव से पहले वोट चोरी का मुद्दा गरमाया, अखिलेश पर दयाशंकर सिंह का हमला।

उत्तर प्रदेश में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से चुनाव आयोग और भाजपा पर लगाए गए आरोपों पर योगी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में संभावित हार को देखते हुए अभी से बहाने तैयार कर रहे हैं। हालांकि, यह दयाशंकर सिंह का राजनीतिक आरोप है, चुनावी नतीजों या भविष्य की हार का कोई प्रमाण नहीं।

‘2027 में हार का बहाना बना रहे अखिलेश यादव’।

मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर अपनी राजनीतिक मुश्किलों का ठीकरा संवैधानिक संस्था पर फोड़ना चाहते हैं। उनके मुताबिक, सपा प्रमुख अभी से ऐसा माहौल बनाने में जुटे हैं कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते हैं, तो उसे वोट चोरी से जोड़कर पेश किया जा सके।

दयाशंकर सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग पर आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपने राजनीतिक प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव के आरोपों को राजनीतिक रणनीति करार दिया। ये टिप्पणियां मंत्री का पक्ष हैं, न कि चुनाव आयोग की जांच से स्थापित निष्कर्ष।

2014 और 2017 के चुनाव परिणामों का दिया हवाला।

दयाशंकर सिंह ने अपने बयान में 2014 के लोकसभा और 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब भाजपा और एनडीए को इतनी बड़ी चुनावी सफलता कैसे मिली। मंत्री ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से भाजपा और उसके सहयोगियों ने 73 सीटें जीती थीं। वहीं, 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 403 सदस्यीय विधानसभा में 325 सीटें हासिल की थीं। दयाशंकर सिंह ने इसी चुनावी प्रदर्शन का हवाला देते हुए अखिलेश यादव पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या उस समय भी वोट चोरी कर भाजपा को जिताया गया था। यहां गौर करने वाली बात है कि चुनाव परिणाम अपने आप में वोट चोरी के आरोपों को साबित या खारिज नहीं करते। ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित साक्ष्य और आधिकारिक जांच जरूरी होती है।

कांग्रेस और आपातकाल का भी किया जिक्र।

मंत्री दयाशंकर सिंह ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र को सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस ने पहुंचाया और आपातकाल का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों के लोकतांत्रिक रिकॉर्ड पर सवाल उठाए।

उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। उनके अनुसार, चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवाल राजनीतिक असहमति का हिस्सा हैं। हालांकि, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों का आकलन तथ्यों, दस्तावेजों और आधिकारिक जवाबों के आधार पर किया जाना चाहिए।

वोट चोरी के आरोपों पर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी।

अखिलेश यादव और भाजपा नेताओं के बीच चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर जारी बयानबाजी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर सपा चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर भाजपा नेता इन आरोपों को राजनीतिक बहानेबाजी बता रहे हैं। अब इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के तर्क, उपलब्ध साक्ष्य और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष राजनीतिक बहस की दिशा तय करने में अहम होंगे।

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