आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण, सीएम योगी बोले- मोदी-आबे की दोस्ती ने बदले भारत-जापान संबंध।
भारत-जापान दोस्ती को नई दिशा, आबे मेमोरियल कॉरिडोर पर सीएम योगी ने गिनाई साझेदारी की कहानी।
आबे मेमोरियल कॉरिडोर नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम, भारत-जापान दोस्ती को लेकर सीएम योगी का बड़ा संदेश।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने इसे भारत-जापान की दोस्ती, साझा विरासत और आपसी विश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह गलियारा नई पीढ़ी के लिए एक जीवंत क्लासरूम की तरह काम करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां आने वाले युवा यह समझ सकेंगे कि दूरदृष्टि रखने वाले नेताओं की व्यक्तिगत मित्रता किस तरह दो देशों के बीच भरोसे और दीर्घकालिक साझेदारी में बदल सकती है।

मोदी-आबे की दोस्ती को बताया विश्वास पर आधारित संबंध।
मुख्यमंत्री योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे के संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं की मित्रता पद के कारण नहीं, बल्कि विश्वास के आधार पर बनी थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान शिंजो आबे से उनकी मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों ने भारत-जापान संबंधों को भी नई दिशा देने में भूमिका निभाई।

योगी ने कहा कि 2014 में क्योटो-काशी पार्टनर सिटी समझौता, 2015 में काशी में शिंजो आबे की गंगा आरती में भागीदारी और 2017 में अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास दोनों देशों के बढ़ते सहयोग के महत्वपूर्ण पड़ाव रहे। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और औद्योगिक कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं में भी जापान की भागीदारी रही है।
सेमीकंडक्टर, एआई और ग्रीन हाइड्रोजन तक पहुंची साझेदारी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत-जापान सहयोग अब पारंपरिक बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे भविष्य के क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि जापान के पास तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभा और युवा ऊर्जा है। उनके मुताबिक दोनों देशों की क्षमताओं का समन्वय आने वाले समय में आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा दे सकता है।
उत्तर प्रदेश में जापानी निवेश को लेकर सीएम ने गिनाए प्रयास।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश जापानी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रहा है। उन्होंने यामानाशी के साथ ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में सहयोग, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यीडा क्षेत्र में प्रस्तावित जापानी सिटी तथा इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जापान की प्रिसिजन इंजीनियरिंग और उत्तर प्रदेश का बड़ा बाजार तथा युवा कार्यबल दोनों देशों के सहयोग की संभावनाओं को बढ़ाते हैं।
2027 में भारत-जापान संबंधों के 75 साल पूरे होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और आबे मेमोरियल कॉरिडोर इस अवसर की स्मृति में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने काशी और क्योटो की सांस्कृतिक समानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों शहरों ने विरासत को संरक्षित रखते हुए विकास की राह दिखाई है। कार्यक्रम में शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे सहित जापान का प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा। मुख्यमंत्री ने जापानी भाषा में अतिथियों का स्वागत किया और अपने संबोधन के अंत में ‘अरिगातो गोजाइमासु’ कहकर धन्यवाद दिया।



