उत्तर प्रदेश

भदोही के नाम में ‘संत रविदास नगर’ की वापसी, योगी ने जोड़ी इतिहास और वर्तमान की दो पहचान

भदोही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से पहचान देने की घोषणा दोहराई है। 4 अक्टूबर को भदोही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के बाद यह घोषणा की। इससे जिले के नाम को लेकर करीब तीन दशक से चली आ रही राजनीतिक और प्रशासनिक बदलावों की कहानी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

29 जुलाई को वाराणसी से शुरू हुआ था नाम बदलने का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इससे पहले 29 जुलाई 2026 को वाराणसी में संत रविदास की 650वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम के दौरान भदोही का नाम फिर से ‘संत रविदास नगर’ किए जाने की घोषणा की थी। उस समय मुख्यमंत्री ने संत रविदास की सामाजिक समरसता और भक्ति परंपरा का उल्लेख करते हुए नाम परिवर्तन को उनके सम्मान से जोड़ा था।

अब भदोही की धरती से मुख्यमंत्री ने नाम को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के रूप में रखने की बात कही है। इससे संत रविदास की पहचान के साथ जिले के पुराने नाम ‘भदोही’ को भी बरकरार रखा गया है।

1994 में बना था भदोही नया जिला
भदोही को 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग कर उत्तर प्रदेश का नया जिला बनाया गया था। जिला प्रशासन के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, इस क्षेत्र का नाम ‘भार राज्य’ से जुड़ा है, जिसकी राजधानी भदोही बताई गई है। क्षेत्र में भार शासकों से जुड़े पुराने टीले और तालाबों का भी उल्लेख मिलता है।

इसके बाद जिले के नाम में कई राजनीतिक बदलाव हुए। 4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार ने इसका नाम ‘संत रविदास नगर’ किया। बाद में 1999 में ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम का भी इस्तेमाल किया गया। दिसंबर 2014 में अखिलेश यादव सरकार ने जिले के नाम को फिर ‘भदोही’ किए जाने का फैसला लिया।

नामकरण के साथ राजनीतिक संदेश की चर्चा
अब योगी सरकार द्वारा ‘संत रविदास नगर’ और ‘भदोही’ दोनों को साथ रखने के फैसले को सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। संत रविदास का नाम दलित समाज की आस्था और सामाजिक समरसता की परंपरा से जुड़ा है, जबकि ‘भदोही’ नाम क्षेत्र के ऐतिहासिक संदर्भ को बनाए रखता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में संत रविदास के उस विचार का उल्लेख किया, जिसमें समाज में भेदभाव खत्म करने और सभी के लिए सम्मान एवं भोजन की व्यवस्था की कल्पना की गई थी। उन्होंने इसे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और बिना भेदभाव लाभ पहुंचाने की नीति से जोड़कर प्रस्तुत किया।

विकास परियोजनाओं के बीच नाम की घोषणा
नामकरण की घोषणा ऐसे समय हुई है जब मुख्यमंत्री ने भदोही, औराई और ज्ञानपुर क्षेत्रों से जुड़ी 112 परियोजनाओं पर 1,340 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। भदोही की पहचान देश के प्रमुख कालीन उद्योग केंद्रों में भी होती है।

इस तरह ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम जिले की धार्मिक-सामाजिक पहचान और ऐतिहासिक नाम—दोनों को एक साथ सामने रखता है। हालांकि नाम के प्रशासनिक इस्तेमाल के लिए आगे की औपचारिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

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