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यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा विस्तार! 9.5 साल में बढ़े अस्पताल, CHC और आधुनिक मेडिकल सुविधाएं

9.5 साल में यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था में कितना बदलाव? सरकार के आंकड़ों में अस्पतालों से लेकर क्रिटिकल केयर सुविधाओं तक विस्तार का दावा।

यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था में विस्तार का दावा, 9.5 साल में बढ़े अस्पताल और आधुनिक सुविधाएं

लखनऊ, 21 सितंबर। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे में बड़े बदलाव का दावा किया है। सरकार के मुताबिक जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों तक नेटवर्क बढ़ाया गया है। राज्य के आधिकारिक स्वास्थ्य आंकड़े भी सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार और सेवाओं के बढ़ते उपयोग को दर्शाते हैं।

सरकार के अनुसार वर्ष 2017 में प्रदेश में 109 जिला स्तरीय राजकीय एवं विशिष्ट चिकित्सालय थे, जो 2026 में बढ़कर 234 हो गए। यानी इस श्रेणी में करीब 115 प्रतिशत की वृद्धि का दावा किया गया है। इसी अवधि में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी CHC की संख्या 821 से बढ़कर 977 हुई, जबकि ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 2,811 से बढ़कर 3,035 हो गए।

शहरी स्वास्थ्य केंद्रों का भी विस्तार

शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 2017 के 542 से बढ़कर 2026 में 721 हो गई। यह करीब 33 प्रतिशत वृद्धि है। कुल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या भी 3,353 से बढ़कर 3,756 होने की बात कही गई है।

स्वास्थ्य उपकेंद्रों की संख्या 20,573 से बढ़कर 28,845 होने का दावा है। इसके अलावा प्रदेश में 29,896 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित होने की जानकारी दी गई है। इससे सरकार की रणनीति में प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने को महत्वपूर्ण स्थान मिलने का संकेत मिलता है।

क्रिटिकल केयर और डायग्नोस्टिक सुविधाओं पर जोर

स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार केवल अस्पतालों की संख्या तक सीमित नहीं बताया गया है। सरकार के अनुसार 543 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एनेस्थीसिया क्लीनिक और संबंधित मानव संसाधन की व्यवस्था की गई है। ऑक्सीजन प्लांट और ब्लड स्टोरेज यूनिट भी बढ़ाए गए हैं। 370 CHC पर डिजिटल एक्स-रे मशीनों की व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई है।

इसके साथ ही नर्सिंग शिक्षा के नेटवर्क को भी बढ़ाने का दावा किया गया है। 2017 में CHC से जुड़े नर्सिंग कॉलेजों की संख्या शून्य बताई गई थी, जो 2026 में 73 हो गई।

राजनीतिक रूप से स्वास्थ्य व्यवस्था अहम मुद्दा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्वास्थ्य सुविधाएं सीधे ग्रामीण आबादी, गरीब परिवारों और आम मरीजों से जुड़ा मुद्दा हैं। ऐसे में सरकार इन आंकड़ों को स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार और अपनी नीतियों के परिणाम के रूप में प्रस्तुत कर रही है। वहीं किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था का वास्तविक असर केवल संस्थानों की संख्या से नहीं, बल्कि डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाओं, स्टाफ, उपकरणों और मरीजों को समय पर उपचार मिलने से भी तय होता है।

सरकार के मौजूदा आंकड़े बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विस्तार की तस्वीर पेश करते हैं, जबकि आने वाले समय में इन सुविधाओं की पहुंच और सेवा की गुणवत्ता स्वास्थ्य क्षेत्र में इस विस्तार के प्रभाव को समझने के प्रमुख आधार होंगे।

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