उत्तर प्रदेश

आंधी-तूफान से गिरे पेड़ों पर किसानों को मिलेगी राहत, सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश।

लखनऊ, 11 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में चक्रवाती तूफान, तेज आंधी और अतिवृष्टि के कारण किसानों की निजी भूमि और खेतों में बड़ी संख्या में पेड़ गिरने की घटनाओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित किसानों को राहत देने और गिरे हुए पेड़ों के निस्तारण की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए जिलाधिकारियों, प्रभागीय वनाधिकारियों (डीएफओ) और उत्तर प्रदेश वन निगम को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों को अनावश्यक प्रशासनिक देरी से बचाना और गिरे हुए पेड़ों की लकड़ी के निस्तारण में आ रही परेशानियों को दूर करना है।

किसानों के आवेदनों का समय पर होगा निस्तारण।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि निजी भूमि और खेतों में गिरे पेड़ों को हटाने तथा उनकी लकड़ी के निस्तारण के लिए किसानों की ओर से दिए गए आवेदनों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। वन विभाग और उत्तर प्रदेश वन निगम को नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करते हुए अनावश्यक देरी से बचने के लिए कहा गया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि गिरे हुए पेड़ों की लकड़ी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए आवश्यक अभिवहन अनुज्ञा पत्र यानी ट्रांजिट परमिट प्राथमिकता के आधार पर जारी किए जाएं। इसके लिए निर्धारित वन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से प्रभावित किसानों को अपनी भूमि पर गिरे पेड़ों के निस्तारण में अनावश्यक परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।

सड़कों पर गिरे पेड़ हटाने के निर्देश, यातायात बहाल करने पर जोर।
आंधी और तूफान के कारण सार्वजनिक मार्गों पर गिरे पेड़ों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सड़कों पर पड़े पेड़ों को जल्द हटाया जाए, ताकि यातायात बाधित न हो और आम लोगों को आवागमन में कठिनाई का सामना न करना पड़े।

इस कार्य की निगरानी के लिए जिलाधिकारियों और प्रभागीय वनाधिकारियों को संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। इससे सड़क सुरक्षा और सामान्य जनजीवन को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

किसानों के उत्पीड़न पर रोक और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि गिरे हुए पेड़ों के निस्तारण की प्रक्रिया के दौरान किसानों को किसी भी तरह के मानसिक या आर्थिक उत्पीड़न का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

सरकार के अनुसार, पेड़ों को हटाने, लकड़ी के परिवहन और उसके निस्तारण से जुड़े सभी कार्य निर्धारित वन नियमों के तहत किए जाएंगे। साथ ही, संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो और उन्हें अनावश्यक कार्यालयी प्रक्रियाओं में न उलझना पड़े।

आपदा प्रभावित किसानों को राहत देने पर सरकार का फोकस।
उत्तर प्रदेश में मौसम संबंधी घटनाओं से कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में पैदा हुई समस्याओं के बीच सरकार ने गिरे पेड़ों के निस्तारण को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब जिलाधिकारियों, वन विभाग और वन निगम की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। किसानों को वास्तविक राहत तभी मिल सकेगी, जब आवेदन, परमिट और निस्तारण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार समय पर पूरी होगी।

 

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