उत्तर प्रदेश

योगी सरकार का आंगनबाड़ी कर्मियों को बड़ा फैसला, अब हर साल मिलेंगी तीन साड़ियां।

कैबिनेट बैठक में अतिरिक्त साड़ी देने के प्रस्ताव को मंजूरी, प्रदेश के 3.80 लाख से अधिक कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मिलेगा लाभ।

लखनऊ, 9 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को हर साल दी जाने वाली साड़ियों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में उन्हें एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले के बाद अब पात्र आंगनबाड़ी कर्मियों को सालाना दो के बजाय तीन साड़ियां मिलेंगी।

सरकार के इस निर्णय से प्रदेश की कुल 3,80,290 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को लाभ मिलने का अनुमान है। अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने पर राज्य सरकार करीब 19.02 करोड़ रुपये खर्च करेगी। कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने फैसले से संबंधित जानकारी साझा की।

1.90 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ी हैं कार्यकत्रियां।
वित्त मंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। प्रत्येक केंद्र के लिए एक कार्यकत्री और एक सहायिका का पद स्वीकृत है। इस प्रकार प्रदेश में कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के कुल 3,80,290 स्वीकृत पदों के आधार पर अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

अब तक आंगनबाड़ी कर्मियों को केंद्र और राज्य सरकार की 60:40 वित्तीय भागीदारी वाली व्यवस्था के तहत हर साल दो साड़ियां दी जाती थीं। नई व्यवस्था में तीसरी साड़ी का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपये की दर निर्धारित की गई है। सरकार के अनुसार, इस मद में कुल अनुमानित व्यय 19,01,45,000 रुपये होगा।

नियमित इस्तेमाल और धुलाई की समस्या को ध्यान में रखकर फैसला।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को कार्यस्थल पर निर्धारित वेशभूषा में अपनी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। रोजाना इस्तेमाल, साड़ी की धुलाई, मौसम की परिस्थितियों और कपड़े के अचानक गंदा या खराब होने जैसी स्थितियों को देखते हुए अतिरिक्त साड़ी देने का निर्णय लिया गया है। इससे उन्हें निर्धारित वेशभूषा बनाए रखने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

पोषण और बाल विकास सेवाओं में अहम भूमिका।
उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों और महिलाओं से जुड़ी पोषण सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त आकांक्षात्मक जिलों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों के लिए भी पोषण संबंधी सेवाएं संचालित की जाती हैं।

इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है। ऐसे में सालाना एक अतिरिक्त साड़ी देने का फैसला उनके कार्यस्थल से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम है। इस निर्णय के तहत अतिरिक्त साड़ी की व्यवस्था का वित्तीय भार राज्य सरकार उठाएगी।

 

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