यूपी में इंडस्ट्री का विस्तार तेज, तीन साल में दोगुने से ज्यादा हुए फैक्ट्री पंजीकरण।
फार्मा से ऑटो और बायोप्लास्टिक तक, यूपी में सेक्टर आधारित इंडस्ट्रियल पार्कों पर जोर।
यूपी में औद्योगिक विस्तार को रफ्तार, तीन साल में फैक्ट्री पंजीकरण दोगुने से ज्यादा। 50 हजार से अधिक रोजगार का दावा।

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने की योगी सरकार की नीति के तहत औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, यूपीसीडा के औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्री पंजीकरण की संख्या पिछले तीन वर्षों में दोगुने से अधिक हुई है। वर्ष 2022-23 में करीब 1,400 पंजीकरण के मुकाबले 2025-26 में यह संख्या लगभग 3,300 तक पहुंच गई। इन औद्योगिक गतिविधियों से 50 हजार से अधिक रोजगार सृजित होने की बात कही गई है। हालांकि, व्यापक राज्य स्तर के आंकड़ों में भी औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ोतरी दिखाई देती है। भारत सरकार के वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश में 3,318 नई फैक्ट्रियां पंजीकृत हुई थीं, जो 2020-21 के 1,484 के आंकड़े से लगभग दोगुने से अधिक हैं।
एनसीआर से पूर्वांचल और बुंदेलखंड तक औद्योगिक विस्तार।
सरकार का फोकस औद्योगिक विकास को केवल एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित रखने के बजाय पूर्वांचल और बुंदेलखंड तक विस्तार देने पर है। गोरखपुर, संत कबीर नगर और ललितपुर में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे और प्रमुख राजमार्गों के आसपास नए औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।

ललितपुर में बल्क ड्रग और फार्मा पार्क को औद्योगिक विस्तार के प्रमुख प्रोजेक्ट के तौर पर विकसित किया जा रहा है। Invest UP के अनुसार, इस पार्क में एपीआई, बल्क ड्रग और संबंधित विनिर्माण गतिविधियों के लिए साझा बुनियादी ढांचा और प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं की योजना है।
फार्मा से ऑटो और फूड प्रोसेसिंग तक सेक्टर आधारित पार्क।
यूपीसीडा की रणनीति में क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक पार्कों को अहम स्थान दिया गया है। पीलीभीत के भरा पचपेड़ा क्षेत्र में ऑटो और ऑटो-कंपोनेंट उद्योग से जुड़े निवेश को आकर्षित करने पर जोर है। वहीं, बहेड़ी में फूड प्रोसेसिंग और लखीमपुर खीरी के कुंभी में बायोप्लास्टिक पार्क विकसित करने की योजना है। यूपी की बायोप्लास्टिक नीति में कुंभी को समर्पित बायोप्लास्टिक पार्क के लिए चिन्हित किया गया है।
डिजिटल सिस्टम से निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश।
निवेशकों को भूमि उपलब्ध कराने और परियोजनाओं की निगरानी के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। ईआरपी, एआई आधारित एनालिटिक्स, ड्रोन मॉनिटरिंग, ऑनलाइन नीलामी और वन मैप जैसे माध्यमों से भूमि प्रबंधन और औद्योगिक परियोजनाओं की निगरानी को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास है। वहीं, Nivesh Sarathi पोर्टल निवेश प्रस्ताव से लेकर परियोजना की स्थापना और शिकायत निवारण तक की प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। सरकार का कहना है कि तैयार औद्योगिक भूमि, बेहतर कनेक्टिविटी, क्षेत्र-विशिष्ट पार्क और प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के जरिए उत्तर प्रदेश में विनिर्माण गतिविधियों को गति देने का प्रयास जारी है। इसका उद्देश्य नए निवेश के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाना और प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करना है।



