ओपी राजभर का अखिलेश पर बड़ा हमला, ‘राम-कृष्ण से लेकर शिवपाल तक’ कई मुद्दों पर घेरा।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बयानबाजी तेज होती जा रही है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने अखिलेश यादव की धार्मिक राजनीति, शिवपाल यादव के साथ उनके संबंधों और विपक्ष के चुनाव आयोग से जुड़े विरोध प्रदर्शन को लेकर कई आरोप लगाए। उन्होंने यह भी कहा कि सुभासपा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ है और इसी गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की बात कही।
‘अखिलेश को न राम प्यारे हैं, न कृष्ण’, राजभर का दावा।
ओम प्रकाश राजभर ने अयोध्या में आयोजित धार्मिक कथा में अखिलेश यादव की मौजूदगी के संदर्भ में सपा प्रमुख पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव खुद को भगवान कृष्ण का वंशज बताते हैं, लेकिन मथुरा और अयोध्या जाने को लेकर उनका रुख अलग दिखाई देता है। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व को मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को लेकर चिंता रहती है। यह राजभर का राजनीतिक आरोप है, जिस पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के आधार पर सामने नहीं आई है।

राजभर ने अपने बयान में अखिलेश यादव की राजनीति को लेकर ‘अली’ और ‘बजरंगबली’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख की राजनीति में अलग-अलग समय पर अलग-अलग धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल दिखाई देता है।
शिवपाल यादव को लेकर भी अखिलेश पर निशाना।
सुभासपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव को लेकर भी अखिलेश यादव पर हमला बोला। राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच राजनीतिक संबंधों में अविश्वास की स्थिति है। उन्होंने शिवपाल यादव की सपा में भूमिका पर तंज कसते हुए उनकी स्थिति की तुलना बैंड पार्टी में झुनझुना बजाने वाले व्यक्ति से की। यह टिप्पणी राजभर की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है।
विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर चुनाव आयोग पर राजभर का बचाव।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर भी ओम प्रकाश राजभर ने कांग्रेस और सपा को निशाने पर लिया। उन्होंने चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीतीं। उनके मुताबिक, यदि चुनाव में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी होती तो विपक्षी दलों को ये सीटें नहीं मिलतीं। राजभर ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की सीटों में आए बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2019 में भाजपा को 303 सीटें मिली थीं, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 240 रह गई। उनके अनुसार, इन आंकड़ों को चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष के आरोपों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
2027 को लेकर बोले- NDA के साथ हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजभर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी एनडीए के साथ है। उन्होंने सपा और अखिलेश यादव पर गठबंधन बदलने को लेकर भी निशाना साधा और कहा कि अखिलेश यादव ने अलग-अलग दलों के साथ कई बार राजनीतिक समझौते किए हैं। राजभर ने समाजवादी पार्टी को लेकर ‘डूबती हुई नाव’ जैसी टिप्पणी भी की। राजभर ने 2027 में 350 सीटों पर जीत का दावा भी किया है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक दावा है, न कि स्वतंत्र सर्वेक्षण या चुनावी पूर्वानुमान। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी आगे हैं और ऐसे में सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के नेताओं के बीच बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। फिलहाल राजभर के ताजा बयानों ने सपा, एनडीए और विपक्षी गठबंधन की राजनीति को लेकर प्रदेश में चल रही राजनीतिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।



