उत्तर प्रदेश

भदोही को फिर मिलेगी संत रविदास के नाम से पहचान, योगी कैबिनेट ने ‘संत रविदासनगर भदोही’ प्रस्ताव पर लगाई मुहर।

सपा सरकार में हटाया गया था संत रविदास का नाम, योगी सरकार के फैसले के सामाजिक और राजनीतिक मायने।

लखनऊ, 9 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भदोही जिले के नाम में संत शिरोमणि गुरु रविदास का नाम दोबारा शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जिले का नाम ‘संत रविदासनगर भदोही’ करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। सरकार के इस निर्णय के बाद जिले के नामकरण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज होने की संभावना है।

कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि नए नाम में संत रविदास के नाम के साथ भदोही की पहचान भी बनाए रखी जाएगी। सरकार ने इस फैसले को संत रविदास के योगदान और भारतीय संत परंपरा के प्रति सम्मान से जोड़कर देखा है। प्रस्ताव के मुताबिक, जिले के नाम में बदलाव के बावजूद भदोही का नाम भी शामिल रहेगा।

1997 में बना था संत रविदास नगर, 2014 में बदला नाम।
भदोही जिले के नामकरण का इतिहास उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ा रहा है। वर्ष 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के नेतृत्व वाली सरकार ने जिले का नाम संत रविदास नगर रखा था। इसके बाद वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने जिले का नाम बदलकर भदोही कर दिया था।

अब योगी सरकार ने संत रविदास का नाम दोबारा शामिल करने का प्रस्ताव मंजूर किया है। इस तरह प्रस्तावित नाम में संत रविदास की पहचान और भदोही की क्षेत्रीय पहचान, दोनों को स्थान दिया गया है। हालांकि, नाम परिवर्तन को औपचारिक रूप से लागू करने के लिए संबंधित सरकारी प्रक्रिया और अधिसूचना की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

दलित और राजभर समाज के संदर्भ में भी चर्चा।
इस फैसले के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। संत रविदास दलित समाज में सामाजिक समानता, भक्ति और सुधार की परंपरा के प्रमुख प्रतीक माने जाते हैं। दूसरी ओर, भदोही की ऐतिहासिक विरासत को लेकर स्थानीय स्तर पर विभिन्न सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ सामने आते रहे हैं। इनमें भार राज से जुड़ी मान्यताओं का भी उल्लेख किया जाता है, जिसे राजभर समाज अपनी ऐतिहासिक पहचान से जोड़कर देखता है।

ऐसे में प्रस्तावित नाम में संत रविदास और भदोही, दोनों का उल्लेख सामाजिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषण के स्तर पर इसे दलित और राजभर समुदायों तक संदेश पहुंचाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है। हालांकि, सरकार ने इसे किसी विशेष समुदाय को ध्यान में रखकर लिया गया राजनीतिक फैसला घोषित नहीं किया है।

राजस्व संहिता के तहत आगे बढ़ेगी प्रक्रिया।
सरकार के अनुसार, नाम परिवर्तन का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की संशोधित धारा 6(2) के तहत लाया गया है। इस प्रावधान के अंतर्गत राज्य सरकार अधिसूचना के माध्यम से राजस्व क्षेत्र का नाम निर्धारित कर सकती है। प्रस्ताव को केंद्र सरकार के 11 सितंबर 1953 के संबंधित परिपत्र के अनुरूप भी बताया गया है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब आगे की आधिकारिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। अंतिम अधिसूचना जारी होने और निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही नए नाम के लागू होने की स्थिति स्पष्ट होगी।

 

Related Articles

Back to top button