उत्तर प्रदेश

योगी सरकार में बिजली व्यवस्था का ‘बड़ा सुधार’! वितरण हानि 20.63% से घटकर 13.04%, राजस्व वसूली में भी तेजी

लखनऊ, 7 सितंबर। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था में बड़े सुधार का दावा किया है। सरकार के मुताबिक बिजली वितरण में होने वाले नुकसान, बिजली चोरी पर नियंत्रण और राजस्व वसूली के मोर्चे पर पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 में 20.63 प्रतिशत रही वितरण हानि वर्ष 2025-26 में घटकर 13.04 प्रतिशत रह गई है।

सरकार के अनुसार इसी अवधि में एटीएंडसी यानी एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल लॉस में भी बड़ी कमी दर्ज की गई। यह हानि 31.19 प्रतिशत से घटकर 17.83 प्रतिशत तक पहुंच गई। सरकार का कहना है कि फीडर स्तर पर लगातार निगरानी, बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई और डेटा आधारित समीक्षा के चलते यह सुधार संभव हुआ है।

आंकड़ों के मुताबिक कृषि फीडरों को छोड़कर प्रदेश में फीडरों की संख्या भी बढ़ी है। वर्ष 2020-21 में जहां इनकी संख्या 18,351 थी, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 21,463 हो गई। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 हो गई। यानी 2,332 अतिरिक्त फीडर लाभकारी श्रेणी में पहुंचे हैं। लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी भी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई।

डिस्कॉम स्तर पर पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बाद केस्को 39 प्रतिशत, दक्षिणांचल और मध्यांचल 37-37 प्रतिशत तथा पूर्वांचल 22 प्रतिशत पर रहा।

हाई लॉस क्लस्टर मॉडल से वसूली में तेजी
बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए लागू हाई लॉस क्लस्टर मॉडल के तहत 703 क्लस्टर, 1,703 फीडर, 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 वितरण ट्रांसफार्मरों को अभियान में शामिल किया गया। सरकार के अनुसार इस दौरान 654 करोड़ 31 लाख रुपये की बकाया वसूली की गई, जबकि 1,01,548 नए विद्युत कनेक्शन जारी किए गए।

दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में भी वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से घटकर 14.78 प्रतिशत और एटीएंडसी हानि 31.03 प्रतिशत से घटकर 19.57 प्रतिशत रह गई। यहां थ्रू-रेट भी 3.65 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 4.06 रुपये हो गया।

हाई लॉस फीडरों पर कार्रवाई का असर
सरकार के आंकड़ों में कुछ फीडरों पर हुए सुधार को खास तौर पर रेखांकित किया गया है। तालबेहट टाउन-2 ललितपुर में एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत, मणिकापुर सीरी कासगंज में 87 से 53 प्रतिशत और राल मथुरा में 83.62 से घटकर 47.82 प्रतिशत रह गई।

आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों में घाटा भी 22.53 करोड़ रुपये से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया। सरकार के मुताबिक यह करीब 21 प्रतिशत की कमी है।

योगी सरकार इन आंकड़ों को बिजली क्षेत्र में अपने कार्यकाल के दौरान किए गए सुधारों की उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक फीडर स्तर पर दैनिक समीक्षा, लगातार मॉनिटरिंग और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने से विभाग में वित्तीय अनुशासन मजबूत हुआ है। अब सरकार का जोर बिजली चोरी पर और प्रभावी नियंत्रण, राजस्व वसूली बढ़ाने और प्रदेश की विद्युत वितरण व्यवस्था को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाने पर है।

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