उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा-6.0 समीक्षा बैठक एवं सम्मान समारोह में सम्मिलित हुए

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा नेपाल से जुड़े उत्तर प्रदेश के जनपद महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत के दुर्गम क्षेत्रों में विशेषकर जनजातीय एवं वंचित लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराती है और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी करती है। इस स्वास्थ्य सेवा यात्रा से जुड़े लोग अपनी सेवा और संवेदना के माध्यम से अन्तिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं, जो सच्ची राष्ट्रभक्ति है। स्वास्थ्य सेवा यात्रा अभियान को हमें आंदोलन बनाना होगा। इसके लिए सभी का सहयोग एवं प्रयास आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा-6.0 समीक्षा बैठक एवं सम्मान समारोह में अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर उन्होंने गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा में विशिष्ट योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया। ज्ञातव्य है कि गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा नेशनल मेडिकोज़ ऑर्गेनाइजेशन एवं श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास के तत्वावधान में आयोजित की जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक स्वास्थ्यकर्मी इस यात्रा से स्वैच्छिक रूप से जुड़ते हैं, जो प्रेरणादायी है। वर्ष-2019 से यह यात्रा संचालित की जा रही है। वर्ष-2019 में 6,000 पेशेंट देखे गए और वर्ष-2026 में यह संख्या 2.66 लाख तक पहुंच चुकी है, जो यात्रा की लोकप्रियता और इसकी विराटता को प्रदर्शित करती है। वह स्वयं इस यात्रा कार्यक्रम से शुरू से जुड़े हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में कार्य करना होगा, क्योंकि जब माँ स्वस्थ होगी, तो बच्चा स्वस्थ होगा, मां और बच्चा स्वस्थ रहेंगे, तो समाज स्वस्थ रहेगा और यदि समाज स्वस्थ रहेगा, तो राष्ट्र को सशक्त होने से कोई नहीं रोक सकता। हमें लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के कार्यां में तेजी लानी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि थारू जनजाति के लोगों का सम्बन्ध महाराणा प्रताप के वंश से माना जाता है। यह तराई एवं सीमावर्ती क्षेत्र में राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ निवास करते हैं। यह लोग सम्मानजनक ढंग से रहें, इसके लिए सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। इमलिया कोडर, बलरामपुर श्रद्धेय नानाजी देशमुख जी की साधनास्थली रही है। यहां थारू जनजाति से जुड़े बच्चों के लिए छात्रावास एवं स्कूल का निर्माण कराया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले वनटांगिया लोगों को वोट देने का अधिकार नहीं था। सरकार की विभिन्न सुविधाओं का लाभ उन्हें प्राप्त नहीं होता था। उनका जीवनस्तर अत्यन्त निम्न होता था। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश सरकार ने इन 54 वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा प्रदान किया। आंगनबाड़ी केन्द्र, बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों का निर्माण कराया गया। यहां के लोगों को आवास, शौचालय, विद्युत की सुविधा, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पेंशन सुविधाओं के साथ ही, शासन की अन्य विभिन्न योजनाओं से 100 प्रतिशत सेचुरेट करने का कार्य किया गया। इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार मुसहर बस्तियों, थारू, चेरो, गोंड़, बुक्सा, सहरिया, कोल, खरवार जनजातियों को सरकार की योजनाओं से 100 प्रतिशत सेचुरेट करने की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री कहा कि बहराइच के भरथापुर गांव में लोगों को मकान, जमीन के पट्टे व शासन की सुविधाओं से जोड़ने का कार्य किया जाएगा। कल वह स्वयं इस कार्यक्रम से जुड़ने के लिए भरथापुर गांव जा रहे हैं। यह गांव शारदा और सरयू नदी के तट पर बसे हैं। यहां के लोग बाढ़ व वन्यजीवों से प्रभावित हैं। इसलिए प्रदेश सरकार इन लोगों को सुरक्षित जगह में विस्थापित कर विभिन्न सुविधाओं से युक्त आवासीय कालोनी की सुविधा प्रदान करने जा रही है। साथ ही, इन्हें भूमि के पट्टे भी दिये जाएंगे।

वर्ष 1971 में पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए विस्थापित हिन्दू जो जनपद लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, रामपुर और बिजनौर में जैसे-तैसे गुजर बसर कर रह रहे हैं,  उनके लिए हमारी सरकार आगामी अप्रैल माह में मकान के साथ विभिन्न सुविधाएं व भूमि के पट्टे उपलब्ध कराएगी। यह बातें दिखती हैं कि यदि हम एकजुट होकर किसी कार्य के साथ जुड़ते हैं, तो परिणाम हमारे सामने आते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिटीजनशिप अमेंडमेण्ड एक्ट के माध्यम से इन विस्थापित हिन्दुओं को नागरिकता देने की कार्यवाही को आगे बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति के जीवन के उन्नयन के लिए हम अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। कर्तव्यों के प्रति हमारा समर्पण सच्ची राष्ट्रभक्ति है। एक चिकित्सक को संवेदना के साथ समाज की सेवा करने का अवसर मिलता है।  गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा ने दुर्गम क्षेत्रों में रह रहे लोगों व अन्य लोगों के बीच की दूरी को कम करने का काम किया है, जो प्रधानमंत्री के विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक कारगर कदम है। हमें सभी को साथ लेकर चलना होगा और विकास की समग्र और समावेशी अवधारणा को आगे बढ़ना होगा।

Related Articles

Back to top button