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अखिलेश यादव पर बरसे OP राजभर और संजय निषाद, रोजगार से अयोध्या तक साधा निशाना

‘नौकरियों का रेट तय होता था’, राजभर का अखिलेश पर हमला, संजय निषाद ने भी घेरा

अखिलेश यादव पर OP राजभर और संजय निषाद का हमला, रोजगार से अयोध्या तक सियासी वार-पलटवार

लखनऊ, 3 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के रोजगार, निवेश, शिक्षा और सरकार से जुड़े बयानों पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और डॉ. संजय निषाद ने तीखा पलटवार किया है। दोनों नेताओं ने 2017 से पहले की सपा सरकार और मौजूदा योगी सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए अखिलेश यादव पर कई आरोप लगाए।

‘सपा ने हमारे सिंबल पर अपने प्रत्याशी लड़ाए’, राजभर का आरोप

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर गठबंधन के दौरान धोखा देने का आरोप लगाया। राजभर के मुताबिक, पिछले विधानसभा चुनाव में सुभासपा के सिंबल का इस्तेमाल करते हुए सपा के 12 प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा गया था। उन्होंने कहा कि केवल नेताओं को साथ लेने से वोट नहीं मिलता और गठबंधन में जमीनी सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण होते हैं।

राजभर ने सपा में हाल में शामिल हुए नेताओं को लेकर भी तंज कसा और उन्हें ‘दगे हुए कारतूस’ बताया। उनका कहना था कि लगातार दल बदलने वाले नेताओं से किसी पार्टी को अपने आप वोट बैंक हासिल नहीं हो जाता।

रोजगार के मुद्दे पर ‘नौकरियों के रेट’ का आरोप

अखिलेश यादव के रोजगार और सरकारी नौकरियों से जुड़े सवालों पर राजभर ने सपा सरकार के कार्यकाल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उस समय सरकारी नौकरियों में कथित तौर पर पैसे और प्रभाव का खेल चलता था। राजभर ने इसी संदर्भ में शिवपाल यादव पर भी तंज कसते हुए नौकरी के अलग-अलग ‘रेट’ तय होने का आरोप लगाया। ऐसे आरोप राजभर पहले भी सार्वजनिक रूप से लगा चुके हैं।

इसके मुकाबले राजभर ने मौजूदा सरकार की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बताया और दावा किया कि योगी सरकार में बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। उन्होंने रोजगार मेलों और स्वरोजगार के लिए ऋण योजनाओं का भी जिक्र किया।

निवेश के मुद्दे पर भी अखिलेश को घेरा

राजभर ने उत्तर प्रदेश में निवेश के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। उन्होंने दावा किया कि सपा सरकार के दौरान निवेशक उत्तर प्रदेश आने से हिचकते थे, जबकि मौजूदा सरकार के दौरान बड़े औद्योगिक समूह प्रदेश में निवेश कर रहे हैं।

राजभर ने सैमसंग जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े उद्योगों के आने से प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सरकार के औद्योगिक विकास को राजनीतिक नजरिए से देख रहा है।

कानून-व्यवस्था पर भी सपा बनाम योगी सरकार की तुलना

राजभर ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी दोनों सरकारों की तुलना की। उन्होंने सपा शासन के दौरान दंगों और अपराध का आरोप लगाते हुए योगी सरकार में कानून-व्यवस्था बेहतर होने का दावा किया। हालांकि, ये आंकड़े और दावे राजभर के राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं।

अयोध्या दौरे पर संजय निषाद का तंज

वहीं, कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दौरे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देर से ही सही, अखिलेश अयोध्या आ रहे हैं तो उनका स्वागत है। साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव से भगवान श्रीराम और निषादराज के दर्शन करने तथा पिछली गलतियों के लिए माफी मांगने की बात कही।

संजय निषाद ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार पर सवाल उठाना है, लेकिन जनता को 2017 से पहले और उसके बाद के कार्यकाल की तुलना करनी चाहिए। उन्होंने रोजगार, भर्ती प्रक्रिया, कानून-व्यवस्था और कथित घोटालों को लेकर सपा सरकार पर सवाल उठाए।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में रोजगार, निवेश, कानून-व्यवस्था और अयोध्या जैसे मुद्दे सियासी बहस के केंद्र में आ रहे हैं।

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